aaj se fir ise prarambh kare
ShriRam Gupta ं''अगर मायूस लम्हों में ज़रा तुम साथ दे देतेतो हम कागज़ की कश्ती से समंदर पार कर जाते ''
Bal Krishn Birlaवैसे तो सच ही बोला करते हैं हमपर रोज़ कैसा हूँ ऐसे पूछा ना करो
Prashant Vermaनींद को उनके ख़्वाबों की कैसी ये आदत लगी हैवो आने से कतरायें ख़्वाबों में तो नींद कैसे आये
aaj se fir ise prarambh kare
ReplyDeleteShriRam Gupta ं
ReplyDelete''अगर मायूस लम्हों में ज़रा तुम साथ दे देते
तो हम कागज़ की कश्ती से समंदर पार कर जाते ''
Bal Krishn Birla
ReplyDeleteवैसे तो सच ही बोला करते हैं हम
पर रोज़ कैसा हूँ ऐसे पूछा ना करो
Prashant Verma
ReplyDeleteनींद को उनके ख़्वाबों की कैसी ये आदत लगी है
वो आने से कतरायें ख़्वाबों में तो नींद कैसे आये